Thursday, April 23, 2009

एकटक सी देखती आँखों में.....


















एकटक सी देखती आँखों में.....

बस जाने को जी चाहता है,

तेरी पलकों के झुकने से पहले.....

सजदे में सर झुकाने को जी चाहता है,

लौट ना जाओ तुम हर बार की तरह.....

आज तो बाहों में भरने को जी चाहता है,

तुम्हारी मुस्कुराहटों में बिखरी हो जैसे चांदनी.....

कैद कर लूं इन लम्हों को यादों में जी चाहता है,

तुम्हारे बिन सुनी लगती है ज़िन्दगी.....

हो जो मुमकिन तेरे हुस्न के आगोश में मरने को जी चाहता है,

एकटक सी देखती आँखों में.....

बस जाने को जी चाहता है!

8 comments:

Ravi Prakash said...

अच्छा लिख लेते हो, ऐसे ही लिखते रहो,,,,,,,,,,,,

sangam ''karmyogi'' said...

aapki taarif karne ko jee chahta hai..!!
sabse acchi kriti hai aapki..

sangam ''karmyogi'' said...

aapki taarif karne ko jee chahta hai..

raj said...

boht hi sunder likha hai...m speechless

Babli said...

मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! आपने बहुत ही सुंदर लिखा है ! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

रवीन्द्र दास said...

achchhi chahat.

satish kundan said...

शुक्रिया आप सभी का की आपको मेरी रचना अच्छी लगी

vandana said...

ektak si dekhti aankhon mein bas jane ko ji chahta hai..............bahut hi khoobsoorat panktiyan aur utna hi khoobsoorat chitra lagaya ai uske sath............dono ek doosre ke poorak lag rahe hain.