Wednesday, June 17, 2009

तुमसे कहना है ये...........















हर
बार की तरह इस बार भी कहा है तुमने क्यों नहीं भूल जाते हो मुझे?

तुमसे कहना है ये...........



आँखों में जो इतना नमी रखोगी मेरे लिए,

क्या भूल पाउँगा मैं तुम्हे सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए....


ख्वाबो में जो कभी गूंजती है हंसी तुम्हारी मेरे लिए,

क्या नहीं देख पाउँगा अब ख्वाबो में भी तुम्हे,

सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

हर वो लम्हा मुझे प्यारी है जिससे जुडी है यादें तुम्हारी मेरे लिए,

क्या याद भी कर पाउँगा उन लम्हों में तुम्हे,

सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

अब!!!!! बस भी करो कहना की भूल जाओ मुझे,

कहीं भूलते- भूलते खुद ही भुला जाऊँ इस भीड़ में सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

Tuesday, June 9, 2009

एक बेटी का प्रश्न मम्मी से.........




















उसने
अपने घर में कहा...''मेरी दोस्ती एक लड़के से है.''

घर
में विस्मय से सबने कहा लड़के से!!!!!!!

तभी
मम्मी ने कहा....''तुमसे हमने कहा था लड़को से दोस्ती करना, फिर यह क्या है.''

मम्मी वो उस तरह का लड़का नहीं जैसा आप सोचती हैं,

वो
मेरा दोस्त है सिर्फ दोस्त,क्या दोस्ती में लड़का-लड़की का भेद किया जाता है?

बेटी
ने प्रश्न किया...

मम्मी
थोडी देर चुप रहीं....फिर बोली...

''
बेटी दोस्ती सिर्फ दोस्ती होती है उसमे कोई भेद नहीं,

लेकिन
समाज इस दोस्ती को बुरी नजर से देखता है''

बेटी
ने फिर प्रश्न किया...''क्या समाज हम से ही बनता है?''

हाँ
मम्मी ने कहा.... तब उसने पलट कर फिर प्रश्न किया...

''
क्या हम नहीं बदल सकते?''

मम्मी
सतब्ध थीं..क्योंकि वो भी औरत है,

उन्हें
भी झेलना पड़ा है इन सब प्रश्नों को...

फिर
भी मम्मी ने अपने भावो को छुपाते हुय कहा....

''
आज के बाद उस लड़के से तुम्हारी दोस्ती नहीं रहेगी बस!''

बेटी
रो पड़ी उसने रोते हुए कहा...

''
मम्मी क्या मेरी जगह भइया होता और आपसे कहता मुझे किसी लड़की से दोस्ती है तो क्या आप उसे भी ऐसा ही कहती?''

मम्मी
बेटी के प्रश्न को सुनकर चुप हो गई.

तभी
एक 'तमाचा'!!!''लड़कियों का अधिकार नहीं प्रश्न करना''

मम्मी
ने कहा और रोते हुए अपने कमरे में में चली गईं ...

बेटी
एकटक उन्हें देखती रही वो मम्मी को दोष दे,

समाज
को या खुद को प्रश्न अनुत्तर रह गया....

Tuesday, June 2, 2009

क्यूं....
















क्यूं
....ये बेताबी है तुम्हे देखने की,


क्यूं...ये बेचैनी है तुम्हे पाने की,


क्यूं....मेरे सपने में आती हो,


क्यूं.....दूर होकर भी पास नजर आती हो,


शायद! अब बिछुड़ने को हो...


इसलिए बहुत याद आती हो!!!!!!!!!!