Tuesday, June 2, 2009

क्यूं....
















क्यूं
....ये बेताबी है तुम्हे देखने की,


क्यूं...ये बेचैनी है तुम्हे पाने की,


क्यूं....मेरे सपने में आती हो,


क्यूं.....दूर होकर भी पास नजर आती हो,


शायद! अब बिछुड़ने को हो...


इसलिए बहुत याद आती हो!!!!!!!!!!

11 comments:

Ravi Prakash said...

I must say u r going to be a good poet, nice poem..........

SAHITYIKA said...

hey.. may be u r right..
jab koi door jaane wala ho. shayad tabhi uski bahut yaad aati hai.
nice one.. :)

Babli said...

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ कि आपको मेरी शायरी पसंद आई!
वाह वाह क्या बात है! बेहतरीन और रोमांटिक कविता के लिए बधाई! बहुत बढ़िया लगा! लिखते रहिये!

vandana said...

aisa bhi hota hai kabhi kabhi.

sangam ''karmyogi'' said...

ऊत्तम ...!

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

शायद! अब बिछुड़ने को हो...
इसलिए बहुत याद आती हो

सुन्दर ,बहुत बढ़िया

satish kundan said...

रवि जी, साहित्यिका जी,बबली जी,वंदना जी,संगम बाबु,और अनहद जी आप सभी का तहे दिल से सुक्रिया,की आपको मेरी रचना पसंद आई...

Murari Pareek said...

सही है गुरु वक़्त के मुताबिक मेरी हालत कुछ मिलती जुलती है!!

sharan said...

bahut pyari kavita hai
or sach bhi jab koi humse door jane wala hota hai tabhi usski bahut yaad aati hai
keep it up

sharan said...

waise isska photo bhi bahut achchha hai........

Rajeev said...

dil ki gahrai me ja basi ye kavit.aapki agli racahna me q ka jawab chahunga.