Tuesday, June 9, 2009

एक बेटी का प्रश्न मम्मी से.........




















उसने
अपने घर में कहा...''मेरी दोस्ती एक लड़के से है.''

घर
में विस्मय से सबने कहा लड़के से!!!!!!!

तभी
मम्मी ने कहा....''तुमसे हमने कहा था लड़को से दोस्ती करना, फिर यह क्या है.''

मम्मी वो उस तरह का लड़का नहीं जैसा आप सोचती हैं,

वो
मेरा दोस्त है सिर्फ दोस्त,क्या दोस्ती में लड़का-लड़की का भेद किया जाता है?

बेटी
ने प्रश्न किया...

मम्मी
थोडी देर चुप रहीं....फिर बोली...

''
बेटी दोस्ती सिर्फ दोस्ती होती है उसमे कोई भेद नहीं,

लेकिन
समाज इस दोस्ती को बुरी नजर से देखता है''

बेटी
ने फिर प्रश्न किया...''क्या समाज हम से ही बनता है?''

हाँ
मम्मी ने कहा.... तब उसने पलट कर फिर प्रश्न किया...

''
क्या हम नहीं बदल सकते?''

मम्मी
सतब्ध थीं..क्योंकि वो भी औरत है,

उन्हें
भी झेलना पड़ा है इन सब प्रश्नों को...

फिर
भी मम्मी ने अपने भावो को छुपाते हुय कहा....

''
आज के बाद उस लड़के से तुम्हारी दोस्ती नहीं रहेगी बस!''

बेटी
रो पड़ी उसने रोते हुए कहा...

''
मम्मी क्या मेरी जगह भइया होता और आपसे कहता मुझे किसी लड़की से दोस्ती है तो क्या आप उसे भी ऐसा ही कहती?''

मम्मी
बेटी के प्रश्न को सुनकर चुप हो गई.

तभी
एक 'तमाचा'!!!''लड़कियों का अधिकार नहीं प्रश्न करना''

मम्मी
ने कहा और रोते हुए अपने कमरे में में चली गईं ...

बेटी
एकटक उन्हें देखती रही वो मम्मी को दोष दे,

समाज
को या खुद को प्रश्न अनुत्तर रह गया....

23 comments:

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

बहुत अच्छा ,अच्छी रचना

raj said...

achha prishan hai....nice post..

वन्दना अवस्थी दुबे said...

स्वागत है...शुभकामनायें.

समय said...

प्रश्न, संदेह ही उत्स हैं सभी परिवर्तनों का।
लगे रहो मित्र।

दिल दुखता है... said...

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है............

AlbelaKhatri.com said...

bahut bahut achha !

नारदमुनि said...

good. narayan narayan

gargi gupta said...

आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
लिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
गार्गी

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! मुझे बेहद पसंद आया! इसी तरह से लिखते रहिये और हम पड़ने का लुत्फ़ उठाएंगे!

JHAROKHA said...

सतीश जी ,
बहुत कडुवा सच अIपने लिखा है .अभी भी हमारे समाज की मानसिकता नही बदल रही है.
शुभकामनाओ के साथ.

ओम आर्य said...

सही सवाल है मम्मी से नही कहे तो अच्छा है क्योकि मम्मी भी समाज के प्रभाव के वजह से ऐसा बोलती है ........पर सटीक सवाल

shama said...

Aaj samay nishchay hee badal raha hai...!

vandana said...

bahut hi jwalant prashn uthaya hai..........jiska jawab wakai dhoondhna hoga.......beshak ab badlaav aane laga hai magar bahut jyada nhi,abhi bhi mansikata wo hi hai.

Murari Pareek said...

दरअसल लड़की को बहुत ही संभाल के रखना है, घर की इज्जत है लड़की | ऐसा हमारे समाज की रगों मैं बसा हुआ है | हम कमेन्ट करते हें समाज पर, पर समाज मैं हम भी आते हें, अपने ही घर मैं सोचिये की अगर बहन या बेटी, किसी लड़के के साथ दोस्ती करती है, तो हम चिंतित होते है??

मीडिया दूत said...

और हम कहते है कि तालिबान सख्त है नो औरतों को दबाता है...अपने गिरेबां में कोई नहीं झांकता

Pragya said...

afsos hota hai ki aaj ke samay me bhi betiyon ke kai prashna anuttarit hi hai....

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

अल्पना वर्मा said...

अच्छा लिखा है..बदलते समय /ज़माने में भी कई प्रश्न ऐसे हैं जो अनुत्तरित हैं.
कारण तलाशने होंगे.

Ravi Prakash said...

हमारे समाज में आज भी लड़के और लड़की की दोस्ती को गलत ही माना जाता है, और एक बेटी का अपनी माँ से ऐसा प्रश्न.... बहुत ही अच्छा बन पड़ा है

प्रदीप मानोरिया said...

सार्थक बात की है आपने कुंदन जी

धन्यवाद

shikha varshney said...

हमारे समाज का एक कड़वा सच शब्दों में पिरोया है आपने. सच है हमारी स्थिति तभी बदलेगी जब हम स्वम को बदलेंगे.बहुत अच्छे.

sharan said...

hamare samaj ka shayad sabse karva prashn jiska javab kisi ke pass nahi hota hai sari jindagi in savalo me hi bit jati hai
'बेटी दोस्ती सिर्फ दोस्ती होती है उसमे कोई भेद नहीं,

लेकिन समाज इस दोस्ती को बुरी नजर से देखता है''
kyun har riste ka sahi naam chahta hai ye samaj
'बेटी दोस्ती सिर्फ दोस्ती होती है उसमे कोई भेद नहीं,

लेकिन समाज इस दोस्ती को बुरी नजर से देखता है''


''क्या हम नहीं बदल सकते?''
hamara samaj badlna hi nahi chata hai...............


''मम्मी क्या मेरी जगह भइया होता और आपसे कहता मुझे किसी लड़की से दोस्ती है तो क्या आप उसे भी ऐसा ही कहती?''
hum ladhko ke humesa aisa hi hota hai
प्रश्न अनुत्तर रह गया..................
aisa ques jisa ans khud hum ladhko ke pass bhi nahi hai
bahut sachi rachna hai
keep it up

Rajeev said...

desh ko ajad huye 63 saal ho gaye lekin ladkiya aaj v gulami ki janjir me jakari hai.jis desh ya samaj me agar aaj v ladkiyo ko ladko se dosti ki ajadi nahi milta to wo desh gulam hi samjha jayega aapki ye kavita desh ki ajadi par ? chinh laga raha hai. ladkiyo ki ajadi k liye desh aur samaj ko apne mansikta me badlab lane ki jarurat par prakash dal rahi hai aapki ye kavita.muddaparak,prernadayak,josh se bhra-pura hai apki ye kavita.wakai bahut sundar rachana.thanks