Wednesday, June 17, 2009

तुमसे कहना है ये...........















हर
बार की तरह इस बार भी कहा है तुमने क्यों नहीं भूल जाते हो मुझे?

तुमसे कहना है ये...........



आँखों में जो इतना नमी रखोगी मेरे लिए,

क्या भूल पाउँगा मैं तुम्हे सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए....


ख्वाबो में जो कभी गूंजती है हंसी तुम्हारी मेरे लिए,

क्या नहीं देख पाउँगा अब ख्वाबो में भी तुम्हे,

सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

हर वो लम्हा मुझे प्यारी है जिससे जुडी है यादें तुम्हारी मेरे लिए,

क्या याद भी कर पाउँगा उन लम्हों में तुम्हे,

सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

अब!!!!! बस भी करो कहना की भूल जाओ मुझे,

कहीं भूलते- भूलते खुद ही भुला जाऊँ इस भीड़ में सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

14 comments:

Babli said...

वाह वाह क्या बात है! बहुत ही ख़ूबसूरत, उम्दा और रोमांटिक रचना लिखा है आपने! बेहद पसंद आया मुझे! एक बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

Murari Pareek said...

करने पड़ते हैं सुन्दर पंक्तियाँ है, और हकीक़त भी की जमाने के लिए हमें कितने बलिदान !!

vandana said...

bahut hi lajawaab rachna likhi hai.badhayi.

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

बस भी करो कहना की भूल जाओ मुझे
वाह,बात में दम है.सुनिए सब की करिए मन की .

अल्पना वर्मा said...

किसी अपने को भूल पाना बहुत मुश्किल होता है..
अच्छा प्रयास है..

लिखते रहीये..

*KHUSHI* said...

कहीं भूलते- भूलते खुद ही न भुला जाऊँ इस भीड़ में सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

shabdo ki gaherai main dard mahesoos hota hain.. bahut sundar rachana

raj said...

अब!!!!! बस भी करो कहना की भूल जाओ मुझे,
boht sach......

Harkirat Haqeer said...

ए जमाने तू कर ले सितम पे सितम
जिनको मिलना है वो मिल के रहेगें

www.जीवन के अनुभव said...

vaah....bakai bahut khub likhate hai aap aaj pahali baar aapke blog par aana huaa...

Ravi Prakash said...

वाह भाई, क्या खूब लिखा है तुमने, तुम्हारी पिछली सभी रचनाओं की तरह ही लाज़बाब

cartoonist anurag said...

cahut hi gajab ki rachna hai......
badhi......

JHAROKHA said...

कहीं भूलते- भूलते खुद ही न भुला जाऊँ इस भीड़ में सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति …।
पूनम

प्रदीप मानोरिया said...

bahut khoobsoorat bahv poorn rachna

sharan said...

itne dilse kaise likh lete ho!!!!!!!! sach me bahut hi khubshurat rachna hai
क्या भूल पाउँगा मैं तुम्हे सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए....

अब!!!!! बस भी करो कहना की भूल जाओ मुझे,

कहीं भूलते- भूलते खुद ही न भुला जाऊँ इस भीड़ में सिर्फ तुम्हारे ज़माने के लिए.....
sach kaha koi kisi ko kise ke liye nahi bhula pata rishte khud hi ban jate hai bus ye samaj hi usse samjh nahi pata hai
bahut khub