Wednesday, July 1, 2009

यादें........



















दोस्त
बिछुड़कर भी यादों में रहेंगीं आप,

दूर होकर भी अहसासों में बसेंगी आप ,

जो फुर्सत में बैठूँगा कभी अकेला ,

दूर कहीं सन्नाटे में नजर आयेंगीं आप,

आपकी
हंसी यादों में जब-जब आएगी,


आसुओं की बरसात हमें भीगो जायेगी....

आपका वो रूठना-मनाना,

हमारा वो लड़ना-झगड़ना ,

कौंध जायेगा जेहन में हमारे.........

जो
कभी पलटुंगा किताबें पुरानी,


उसमे
अंकित आपकी यादें काफी होंगी हमें तनहाइयों में ले जाने को....


जो कभी गुजरुंगा उन रास्तों से,

जिनपे
साथ थे हम चले कभी ,

वो बार-बार अहसास करायेंगी आपके साथ न होने का......

सच मानिये!!!!!!!! मुश्किल ही नहीं तब नामुमकिन होगा आसुओं को रोक पाना.....

दोस्त
बिछुड़कर भी यादों में रहेंगीं आप,


दूर होकर भी अहसासों में बसेंगी आप ,