Monday, October 19, 2009

बदलाव....













मन
में एक उमंग है जगी सी.........

हर चीज़ अब लगे है नई सी......

भूल
गया था जिस हंसी को ,

लौट
आई है वो चांदनी सी......

अकेले
में गुनगुनाने लगा हूँ,

फिर हवाओं से बतियाने लगा हूँ,

कुछ हुआ ही नहीं था जैसे,

सब भूल सा गया हूँ.....

क्या
किसी के मुश्कुराहटो का इतना भी असर होता है?????

जान गया हूँ मैं,

जिंदगी ख़त्म नहीं होती किसी के जाने से.....


जिंदगी तो बस नित रंग बदलती है किसी न किसी बहाने से.....

जिंदगी
तो बस नित रंग बदलती है किसी न किसी बहाने से....

Friday, October 16, 2009

दिया जलाने चला हूँ मैं...















आज
फिर से दिया जलाने चला हूँ मैं...


सो चुके जज्बातों को फिर से जगाने चला हूँ मैं...

अब..न रखना मुझसे शिकायत ऐ जिन्दगी ..


आज अंधेरों से तुझे उजालों में ले जाने चला हूँ मैं...

आज फिर से दिया जलाने चला हूँ मैं...