Friday, October 16, 2009

दिया जलाने चला हूँ मैं...















आज
फिर से दिया जलाने चला हूँ मैं...


सो चुके जज्बातों को फिर से जगाने चला हूँ मैं...

अब..न रखना मुझसे शिकायत ऐ जिन्दगी ..


आज अंधेरों से तुझे उजालों में ले जाने चला हूँ मैं...

आज फिर से दिया जलाने चला हूँ मैं...

4 comments:

raj said...

स्वर्ग न सही धरा को धरा तो बनाये..
दीप इतने जलाएं की अँधेरा कही न टिक पाए..
इस दिवाली इन परिन्दों के लिए पटाके न चलायें....

वन्दना said...

अब..न रखना मुझसे शिकायत ऐ जिन्दगी ..

आज अंधेरों से तुझे उजालों में ले जाने चला हूँ मैं...

sundar bhavon se saji.

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

लय में लौटने के लिए बधाई
बेहतर सोच ,बेहतर प्रस्तुति

Rajeev said...

lajabab. sabdo me beyakt kar pana mere liye bahut muskil. MINDBLOWING