Monday, October 19, 2009

बदलाव....













मन
में एक उमंग है जगी सी.........

हर चीज़ अब लगे है नई सी......

भूल
गया था जिस हंसी को ,

लौट
आई है वो चांदनी सी......

अकेले
में गुनगुनाने लगा हूँ,

फिर हवाओं से बतियाने लगा हूँ,

कुछ हुआ ही नहीं था जैसे,

सब भूल सा गया हूँ.....

क्या
किसी के मुश्कुराहटो का इतना भी असर होता है?????

जान गया हूँ मैं,

जिंदगी ख़त्म नहीं होती किसी के जाने से.....


जिंदगी तो बस नित रंग बदलती है किसी न किसी बहाने से.....

जिंदगी
तो बस नित रंग बदलती है किसी न किसी बहाने से....

10 comments:

raj said...

जिंदगी ख़त्म नहीं होती किसी के जाने से.....

जिंदगी तो बस नित रंग बदलती है किस न किसी बहाने से.....
achha lga jaan ke.....d show must go on...

वन्दना said...

sach kaha...........zindagi bahanon se rang badalti hai.........bahut sundar bhav.

sharan said...

bahut khubsurt kavita hai........

भूल गया था जिस हंसी को ,

लौट आई है वो चांदनी सी......
bahut payari line hai

क्या किसी के मुश्कुराहटो का इतना भी असर होता है?????

जान गया हूँ मैं,

जिंदगी ख़त्म नहीं होती किसी के जाने
bilkul aisa hi sochna chahiye
ab tak ka sabse achchha poem mujhe yahi laga
keep it up
sach me bahut beutiful poem hai

संगम "कर्मयोगी" said...

ये बदलाव आपकी अच्छी समझ का नतीजा है...
लिखते रहिये..
उत्तम!!

shikha varshney said...

खुबसूरत एहसास अच्छी कविता

Babli said...

वाह वाह क्या बात है! बहुत खूब! इस शानदार, लाजवाब और सुंदर अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!
भाई दूज की हार्दिक शुभकामनायें!

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

बहुत बहुत बधाई ,जिन्दगी के यथार्थ को समझने व समझाने के लिए उम्दा लेखन

वन्दना अवस्थी दुबे said...

क्या बात है! बहुत सुन्दर रचना.

Harkirat Haqeer said...

अब हंसी लौट आई है तो जरुर अच्छी -अच्छी नज्में भी पढने को मिलेंगी ....इन्तजार रहेगा .....!!

ज्योति सिंह said...

bahut sundar rachna .